Saturday, August 14, 2010

दी थी इतनी कुर्बानिया फिर भी भारत आजाद ना रहा॥

दुनिया में अब इंसानियत का ताज ना रहा..
दी थी इतनी कुर्बानिया फिर भी भारत आजाद ना रहा..
घोटालों नें सेंध लगा दी..
भ्रष्टाचार का साया है..
फसाद के कर्कश स्वर से...
मधुर युवा का कोई आवाज ना रहा...
दुनिया में अब इंसानियत का ताज ना रहा...
दी थी इतनी कुर्बानिया फिर भी भारत आजाद ना रहा॥
दुनिया भर की नजरे हम पर...
कुंठा से इतराती है...
हम है इतने लाचार कि अब...
दुश्मनी धुंधली पड़ जाती है...
जुवान पर तो 'जय हो' है पर...
दिलो में माँ का परवाज़ ना रहा...
दुनिया में अब इंसानियत का ताज ना रहा...
दी थी इतनी कुर्बानिया फिर भी भारत आजाद ना रहा...
सोने की चिड़िया थें पहले...
ठाठ से राज करतें थें महलें...
दिल में झुठा प्यार है अब भी....
पर एहसान किसी का अब उधार ना रहा...
दुनिया में इंसानियत का नाम ना रहा...
दी थी इतनी कुर्बानिया फिर भी...
अपना भारत अब आजाद ना रहा....

2 comments:

  1. सबके मन में यही प्रश्न है ...सब चिंतित हैं ....अच्छी प्रस्तुति

    स्वंत्रता दिवस की बधाइयां और शुभकामनाएं

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  2. सही ही कह रहे हैं.

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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