
यूँ सोचता हूँ ..
कि पल जो गुजरतें हैं
वो मेरे थे कभी
अब भी आता हुआ
पल मेरा ही है
फिर ...
क्यूँ तलाशता हूँ
गुजरे पल को अक्सर
उस फिजा को
उस महक को
उस रवानगी को
जो हमने बनाई थी
ये बात, उफ़ ये बात
कि पल जो गुजरतें हैं
वो मेरे थे कभी
अब भी आता हुआ
पल मेरा ही है
फिर ...
क्यूँ तलाशता हूँ
गुजरे पल को अक्सर
उस फिजा को
उस महक को
उस रवानगी को
जो हमने बनाई थी
ये बात, उफ़ ये बात
बीतते पल के साथ महसूस होती है
कि पल-पल की खासियत है अपनी
मगर फिर भी ...
मगर फिर भी ...
गुजरे पल की कसक
आने वाले पल से ज्यादा होती है
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